• ग्रामीण क्षेत्रों से युवा और मजदूर अपने नजदीकी शहरों में रोज़गार के अवसर न तलाश कर बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं आखिर क्या वजह है? जो ज्यादातर लोगों बड़े शहरों की ओर रूख कर रहे हैं।
  • मैं राजस्थान के संदर्भ में बात कर रहा हूं जो शायद पूरे भारत की सच्चाई हो। इसकी वजह है उन छोटे शहरों में रोज़गार के पर्याप्त अवसर न होना है, जिन्हें बढ़ाने के लिए न तो सरकार ध्यान देती है और न ही वहां के स्थानीय विधायक व सांसद। ये जनप्रतिनिधि उस क्षेत्र के मूल निवासी होने के बावजूद वहां के विकास की ओर ध्यान नहीं देते हैं जो वहां के लोगों के पिछड़पन का प्रमुख कारण है। ये प्रतिनिधि अधिकतर समय तो अपने लोगों की उठा-पटक में ही खपा देते हैं। जो समय शेष बचता है उसे सरकार की स्कीमों से अपना कमीशन जुटाने में निकाल देते हैं।
  • शायद कभी न सोचा हो इन विधायकों व सांसदों ने कि हमारा अपने क्षेत्र के प्रति क्या उत्तरदायित्व है। इन्हें विकास की बातें वोट मांगने के समय सूझती है जो विजेता बनने के जश्न में बिसरा (भूला) दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के पास छोटे शहरों में आर्थिक विकास न होना ही वर्तमान विकास की प्रगति में एक बड़ी रूकावट है जो अपराध के हर पहलु को प्रभावी बना देती है।
  • यदि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और मजदूर वर्ग के एक बड़े भाग को ये छोटे शहर रोज़गार उपलब्ध करवा दे तो बड़े शहरों की ओर जाने को लोग मजबूर न होंगे। ऐसा कहां संभव है कि ये छोटे शहर वहां बड़े पैमाने पर रोज़गार उपलब्ध करवा सके। लेकिन ये लोग इन बड़े शहरों में आते हैं और रोज़गार न मिलने पर विवश होकर आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाते हैं।
  • यदि सरकार इन गांवों के नजदीक छोटे शहरों में भी रोजगार के साधन उपलब्ध करवाये तो शायद बड़े शहरों का आधा अपराध खत्म हो जाये। पर इतना सोचने को वक्त कहा।
  • युवा को रोज़गार दो यहीं सब समस्याओं का समाधान हैं कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर होता है। यही वजह है हमारे देश में हर ओर असंतुष्टि का बोलबाला है। 
  • युवा को रोजगार नहीं मिलने व हाईप्रोफाइल लाइफ के मजे लेने के चक्कर में कई अपराध करते है।
  • आज का युवा इस चक्कर में शहरों में आकर गाड़ियां तक चुरा लेते हैं। कारण स्पष्ट है अपने क्षेत्रों में रोजगार नहीं और फिर बड़े शहरों के मुताबिक योग्यता न होना।

जिसे मिले काम, वो क्यूं करे उत्पात।
  • श्रीमान यह किसी आर्थिक समीक्षक की सलाह नहीं है यह वो बेरोज़गार युवा है जो बनना तो अधिकारी चाहता था, लेकिन अभावों ने कुछ भी नहीं बनने दिया। 
  • मेरा तो भारत सरकार व प्रदेश सरकारों से यही कहना है कि वे स्थानीय रोजगार को बड़े स्तर पर बढ़ावा दे और जो बजट बड़ी सिटियों के लिए दिया जाता है उसमें कटौती करे वरना आये दिन पुराना खण्डर होता नहीं कि नई तकनीक की भेंट चढ़ जाता है।
  • जी हां साब मैं आये दिन जयपुर शहर में रोड़ लाइटें बदलते देखता हूं। 
  • पुराना फुटपाथ खराब हुआ नहीं कि उसे तोड़कर नया फुटपाथ बनते देखता हूं। 
  • और तो और जिस रोड़ पर एक गड्ढ़ा नहीं वहां पर नई रोड़ बनते देखता हूं।
  • और जो पिछड़े इलाके हैं वहां तो सिर्फ टूटे रोड़ पर पातियां ही लगती है और रोड़ लाइटें तो बेकार दिखती हैं।