अगर ईश्वर का नाम स्मरण या श्रवण या जबरदस्ती नाम बुलाने से धर्मांतरण होता है तो फिर हम सबका धर्मांतरण हो चुका है


हर बचपन मासूम होता है
न धर्म से रूबरू होता है न जात से
हर बचपन एक सा होता है
वही प्रकृति की गोद और मां का आंचल होता है
हर धर्म—जाति में बचपन मासूम होता है।

मासूम की फितरत है सबको अपना बनाने की
फिर क्या धर्म क्या जाति
हर बचपन एक सा होता है।

हम सब प्रकृति की गोद में और मां के आंचल में बड़े होते हैं। सब एक जैसा है। पर ज्यों—ज्यों हम बड़े होते हैं हमारे जीवन के मायने बदल जाते हैं क्यों?
शायद, पहली बार परिवार से बाहर जाने पर मालूम होता है कि ये अगल धर्म से हैं, ये अलग जाति से है। पर देश एक ही है। वह आसमान एक ही है हर जगह, फर्क तब आता है जब मौसम खराब होता है।
जब हम पढ़ने लगे तो हमें सब धर्मों की अच्छाई पढ़ाई जाने लगी, हमने उनसे शिक्षा ग्रहण की। हमें कभी नफरत करना नहीं पढ़ाया गया।

आज देश में ईश्वर के नाम को लेकर तर्क—कुतर्क हो रहे हैं।
बड़ी विचित्र बात है हमने गांव में कभी दो धर्मों के लोगों में ईश्वर का नाम लेकर लड़ते पहले कभी नहीं देखा। बल्कि वो तो यही कहते हैं स्मरण का नाम अलग है।

ईश्वर के नाम पर देश का माहौल खराब न करें क्योंकि हम सदियों से भारतीय हैं। धर्म भले ही हमारे अलग—अलग रहे हैं, पर हम साथ रहे हैं।
हां, अब सोशल मीडिया पर तर्क—कुतर्क ज्यादा हो रहा है, मैं पूछता हूं किसने अपने धर्म के गरीबों को सहारा दिया है।
जब धर्म एक तो फिर आर्थिक रूप से अलग क्यों?
जब परिवार एक तो सम्पत्ति का बंटवारे में झगड़ा क्यों?

हां, मैं सभी धर्मों के लोगों से कहता हूं अगर कोई यह मानता है कि दूसरे धर्म के ईश्वर का नाम लेने से उसका धर्म भ्रष्ट हो गया या धर्म परिवर्तन हो गया तो फिर हम सब का धर्म भ्रष्ट या परिवर्तन हो चुका है, क्योंकि हमने हमारे दैनिक जीवन में कितने बार दूसरे धर्म के ईश्वर का नाम जाने अनजाने में ले लिया है।
यहां तक कि हमारे कई दोस्ताना रिश्ते एक—दूजे धर्म के लोगों के साथ रहे हैं फिर हम उनका नाम पुकारते हैं तो उसमें ईश्वर का नाम अवश्य रहता है। फिर आपने अपनी जुबान को टोका क्यों नहीं।
शायद, आपको अपने हितों का साधना था।
व्यापार के दौरान हम कितने धर्मों वालों से मिलते हैं।

आप किसी धार्मिक स्थल से गुजरे, भले ही आपके मन में उसके बारे में गलत ख्याल है तो भी आपने उस धर्म के ईश्वर के नाम का स्मरण किया है।

पूरी बॉलीवुड के सेलिब्रिटी विभिन्न धर्मों के किरदार निभाती है।
कभी आपने उनको दूसरे धर्म के किरदार निभाने से रोका?
क्या, दूसरे धर्म के किरदार निभाने से उनका धर्म परिवर्तन हुआ?
क्या, धर्म के बड़े ठेकदारों ने उन्हें धर्मच्युत किया?
शायद, वह उन लोगों की आजीविका का तरीका है।
वे अपने करियर में धर्म को बाधक नहीं मानते हैं।

हम व्यर्थ लड़ रहे हैं
हम खुद को कमजोर कर रहे हैं
हम उन आमजन में नफरत पैदा कर रहे हैं जो जिन्हें दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए सारा दिन चाहिए।
मोहम्मद ने कहा राम तुम से बिजनस के लिए मीटिंग करनी थी कब आओगे।
राम ने कहा मोहम्मद हम सोमवार को मिलते हैं।
अमिताभ ने खुदा गवाह में बादशाह खान का किरदार निभाया, क्या उनका धर्म परिवर्तन हुआ।
सलमान खान ने बंजरगी भाईजान का किरदार निभाया, क्या उनका धर्म परिवर्तन हुआ।

जी, यदि ईश्वर दूसरे धर्म के नाम स्मरण को रोकता तो फिर हमें भी जानवरों की तरह अलग—अलग बनाकर वह भेजता।

सभी धर्मों के कट्टर समझो
प्रकृति है अनमोल
अगर लड़ना है तो प्रकृति के संरक्षण के लिए लड़ो।
आपसी रंजिश को धार्मिक रंग न दो।