• सच कहूं तो राजस्थान सरकार द्वारा आमजन को उपलब्ध करवाई जा रही कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रशंसा के योग्य है क्योंकि मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना वाकई उन प्राइवेट हेल्थ पॉलिसियों से बेहतर है जो हर माह 500-1000 रुपये तक की है और सालाना 10 से 15 हजार रुपये, वही चिरंजीवी में सब कुछ मात्र 850 रुपये सालाना में दिया जा रहा है यानी हर महीने का खर्च लगभग 71 रुपये। साथ ही यह योजना एनएफएसए, कोविड पीड़ितों एवं किसानों को नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। 
  • चिरंजीवी योजना की बीमा प्रीमियम​ की राशि प्राइवेट कम्पनी का 1 माह का प्रीमियम के बराबर है, और बीमा कवर भी 10 लाख रुपये तक का है। चिरंजीवी में कम पैसों में सालभर इलाज की सुविधा, वाकई काबिले तारीफ है।  
  • बहुत भाग्यशाली है राजस्थान की जनता जो इतने कम प्रीमियम पर 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज पूरे साल मिल रहा है।
  • वहीं प्राइवेट कम्पनियों द्वारा अपने एम्प्लॉई को उपलब्ध करवाई जा रही प्राइवेट कंपनियों की हेल्थ पॉलिसियों की बात करें तो यह अब फिजूल खर्ची लग रही है, क्योंकि राजस्थान सरकार की यह पॉलिसी इनसे कई गुना बेहतर है। साथ ही इनमें इलाज का पैकेज बहुत कम है, जो करीब 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक हो सकता है, जो राजस्थान की चिरंजीवी योजना से बहुत कम है।
  • मजे की बात यह है कि ज्यादातर एम्प्लॉई हेल्थ पॉलिसी का लाभ नहीं उठा पाते हैं, क्योंकि जब तक एम्प्लॉई रजिस्टर्ड हॉस्पिटल में एडमिट नहीं होते हैं तब तक उन्हें पॉलिसी का लाभ नहीं मिलता।
  • उन्हें नॉर्मल खांसी, जुकाम और बुखार है उन्हें हॉस्पिटल वाले भर्ती नहीं करते हैं इसलिए हॉस्पिटल फीस, जांच एवं दवाइयों के पैसे स्वयं को वहन करने पड़ते हैं।
  • तो बेकार गया पैसा।
  • हां, हेल्थ पॉलिसी देने वाली कंपनियां जानती है, कि व्यक्ति छोटी-मोटी बीमारियों के लिए हॉस्पिटल में एडमिट होना पसंद नहीं करते, इसलिए वे ओपीडी की सुविधा देने से बचती हैं, ताकि मोटी कमाई हो सके। 
  • राजस्थान सरकार की चिरंजीवी योजना में सरकारी अस्पताल तो जुड़े ही हैं साथ ही योजना से जुड़े प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा भी मिल रही है। योजना संबंधी कोई समस्या आने या इलाज के लिए पैसे मांगने पर अस्पताल वालों पर कार्रवाई की जाती है। 
  • अब तो प्राइवेट कंपनियों को अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली प्राइवेट कंपनियों की हेल्थ पॉलिसी की जगह या तो राजस्थान सरकार की चिरंजीवी योजना दी जाए और बाकी राशि वेतन में एड कर दी जाए जिससे कर्मचारियों को लाभ होगा। और वे कम राशि में 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज करवाने की सुविधा प्राप्त करें।
  • इन प्राइवेट पॉलिसियों के अलावा प्रदेश के कई प्राइवेट कर्मचारी राजस्थान सरकार की चिरंजीवी योजना में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं ताकि उन्हें कर्ज नहीं लेना पड़े।
  • अब तो राजस्थान सरकार ने सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क ओपीडी एवं आईपीडी सुविधा प्रारंभ कर दी है जिसमें उन्हें चिकित्सा परामर्श, दवाइयां एवं जांच सब कुछ फ्री में मिल रहा है। 
  • पर अफसोस इस बात का है ये कंपनियां अपने एम्प्लॉई से ज्यादा अपना मुनाफा सोचती है, क्योंकि हेल्थ पॉलिसी कंपनियां उनके बड़े कर्मचारियों को मोटी कमीशन देती है। जिससे वे प्राइवेट हेल्थ पॉलिसी देना पसंद करती है। 
  • इस योजना के बीमित परिवार को मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना का लाभ भी निःशुल्क मिल रहा है।


प्राइवेट हेल्थ पॉलिसी की जगह कंपनियां अपने एम्प्लॉई को चिरंजीवी योजना का बीमा कवर दें ताकि पैसों की बचत हो