कोई कुछ भी कहें, लेकिन इतना तय है ये जो ऑनलाइन शॉपिंग को फलने—फूलने का भार उठा रहे हैं निश्चित ही इनका भविष्य भी उस बैल की भांति होगा जो आज आवारा सांड़ का खिताब लेकर घूम रहे हैं। 


अभी जितने भी लोग ऑनलाइन सामानों को घर—घर पहुंचाने में पूरी जी जान लगा रहे हैं, शायद बेचारों को कभी इंसेंटिव भी नसीब नहीं होता होगा। वो भार ढो रहे हैं उस बैल की भांति जिसने सभ्यता का भार वहन कर मानव जाति को आज आधुनिकता की चकाचौंध तक पहुंचा दिया है, उस बैल को आज मशीनों ने पूरी तरह उसे किसानों से दूर कर दिया है। 

हां, मुझे लगता है ज्यादा वक्त नहीं, लगभग 10 साल के बाद हमारे घरों पर ऑनलाइन शॉपिंग के सामान पहुंचाने के लिए डिलीवरीमैन नहीं, बल्कि स्वचालित ड्रोन या फिर स्वचालित राबोट आएगा। जो आज के डिलीवरीमैन की जगह ले लेगा, फिर डिलीवरी भी बेकार और नकारा हो जाएगा।


चलो, हमें लगा हमने कह दिया, ईश्वर से दुआ है इनका रोजगार ऐसे ही चलता रहे, खूब तरक्की करें। हम मानव श्रम का सम्मान करते हैं। 


इसलिए कुछ तस्वीरें ऐसी है जो हमें दुखी कर देती है, जैसे — ये नीचे दी जाने वाली