चार्ली चैपलिन: अपनी अदाओं से दुनिया भर के दर्शकों को हंसाने वाले हास्य अभिनेता 

16 अप्रैल को हॉलीवुड हास्य अभिनेता चार्ली चैपलिन का 130वां जन्मदिन है। चार्ली दुनिया के सिनेमा जगत में निर्विवाद रूप से सार्वकालिक सर्वश्रेष्‍ठ हास्य अभिनेता के रूप में जाने जाते थे। उनके चेहरे पर छोटी मूँछें और सर पर काली ऊँची टोपी, तंग कोट, बड़े जूते, ढीली पैंट और छड़ी के साथ ‘ट्रैंप’ के किरदार के रूप में दुनिया भर के सिनेमा प्रेमियों के दिलों में आज भी अमिट पहचान बना चुके हैं।

चार्ली दुनिया के ऐसे अभिनेता थे जिन्हें प्रसिद्ध मैगजीन टाइम ने 6 जुलाई, 1925 को अपने कवर पर जगह दी थी।

जीवन परिचय :—

सिनेमा जगत में अपनी हास्य अदाओं से सबसे को हंसाकर लोटपोट करने वाले चार्ली चैपलिन का जन्म 16 अप्रैल, 1889 को वॉलवर्थ, लंदन में हुआ था। इनका पूरा नाम सर चार्ल्स स्पेंसर चैपलिन था। 

चार्ली के पिता चार्ल्स चैपलिन और माता हैन्ना हिल थी, वे दोनों संगीत हॉल परंपरा में मनोरंजक थे। चार्ली के माता—पिता गायक और कलाकार थे। चार्ली जब 3 साल का था दोनों में तलाक हो गया था। उन्होंने अपने माता—पिता के अभिनय और संगीत कला से उनमें भी इस क्षेत्र में रूचि दिखने लगी और उनसे गाना सीखा था। 

पिता से अलग होने के बाद चार्ली का बचपन काफी मुश्किलों और गरीबी में व्यतीत हुआ। पिता की शराब पीने की लत के कारण परिवार की हालत ठीक नहीं थी और जिसके कारण उनकी मां पागलपन की शिकार हो गई थीं। इसका नतीजा यह हुआ कि चैपलिन को सात साल की उम्र में एक आश्रम में जाना पड़ा था।

हॉलीवुड का सफर

चार्ली की स्कूली शिक्षा सुचारू रूप से नहीं हो पायी थी जिसके कारण वे महज 13 साल की उम्र में ही मनोरंजन, डांस और स्टेज प्ले में भाग लेने लगे। यहीं से उनका अमरीकी फिल्म स्टूडियो में चयन हो गया। इस स्टूडियों से चार्ली सिनेमा जगत में मूक फिल्मों के बादशाह के रूप में उभरकर आये। 

उन्होंने अपने 75 वर्ष के फिल्मी कॅरियर में हास्य अभिनेता, निर्देशक, लेखक, निर्माता और संगीतज्ञ आदि कलाओं की जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दिया।  

चार्ली चैपलिन ने अपने अभिनय से सामान्य दर्शकों को खूब हंसाया भी तो रुलाया भी खूब। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘द किड’, ‘द सर्कस’, ‘द गोल्ड रश’, ‘सिटी लाइट’, ‘मॉडर्न टाइम्ज’, ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ आदि हैं। ये वे फिल्में हैं जिनके लिए आज भी दुनियाभर का सिनेमा जगत चार्ली का हमेशा ऋणी रहेेगा।

चार्ली ने सिनेमा जगत की सभी कलाओं के क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन उन्होंने कॉमिक अभिनेता के रूप में कॉमिक एक्टिंग को नई बुलन्दियों पर पहुंचा दिया और आज भी कॉमिक एक्टिंग में कोई उनकी बराबरी नहीं कर सका है। 

उनकी कॉमिक अभिनय के साथ उनकी चाल को भी दर्शकों द्वारा बहुत पसंद किया गया और आज भी उनकी अभिनय की स्टाइल्स की नकल करके लोगों को हंसाते नजर आते हैं। 

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने 1940 में हिटलर पर 'द ग्रेट डिक्टेटर' फिल्म का निर्माण किया था। इसमें उन्होंने हिटलर की नकल करते हुए उनका मजाक बनाया था।  

चार्ली की फिल्मों के कम्युनिस्ट विचारों के चलते अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन प्रतिबंधों के बावजूद उन्हें 1973 में 'लाइम-लाइट' में बेस्ट म्युजिक के लिए ऑस्कर अवॉर्ड मिला था। वैसे तो यह फिल्म 21 वर्ष पहले ही बनी चुकी थी, लेकिन इसका प्रदर्शन लॉस ऐंजिलिस में 1972 से पहले नहीं हो सका था। जब यह फिल्म यहां प्रदर्शित हुई तो इसका नामांकन ऑस्कर के लिए हो पाया था।

चार्ली के सिनेमा को योगदान के चलते ऑस्कर समारोह में मौजूद जनता ने उनके लिए 12 मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाई थी। ये ऑस्कर के इतिहास में सबसे बड़ा स्टैडिंग ओवेशन माना जाता है।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा वर्ष 1975 में चार्ली चैपलिन को नाइट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उन्हें दो मानद अकादमी पुरस्कार भी दिए गए।

चार्ली ने अपने कॅरियर में अभिनय से खूब दौलत और शोहरत कमाई थी परंतु इसके बावजूद वह एक तन्हा और बेचैन कलाकार थे। उनका एक दर्जन से अधिक महिलाओं से प्रेम प्रसंग रहा था, उनमें से कइयों के साथ विवाह किया और तलाक हुए। खुद दुःखी होते हुए भी उन्होंने हमेशा अपनी कला से अपने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

चार्ली अपने व्यक्तिगत जीवन में जितने अच्छे कलाकार थे, उतने ही सादगी भरे इंसान भी थे। अपने अभिनय से दुनिया के दर्शकों को बिना बोले हंसाने वाले इस कलाकार की 88 वर्ष की अवस्था बीमारी के कारण 25 दिसंबर 1977 को मृत्यु हो गई।

चैपलिन के दफन होने के तीन महीने बाद उनकी कब्र से शव चोरी हो गया था। चोरों ने ऐसा उनके परिवार वालों से पैसा वसूलने के लिए किया था।

चार्ली चैपलिन ने अपने जीवन के कड़े अनुभवों को अपने विचारों के माध्यम से लोगों के सामने रखे हैं जो प्रेरित भी करते हैं। ये निम्नलिखित हैं — 

हंसी के बिना बिताया हुआ दिन, बर्बाद किया हुआ दिन है।
मेरी जिंदगी में बेशुमार दिक्‍कतें हैं लेकिन यह बात मेरे होंठ नहीं जानते, वो सिर्फ मुस्‍कुराना जानते हैं।
आईना मेरा सबसे अच्‍छा दोस्‍त है क्‍योंकि जब मैं रोता हूं तो वो कभी नहीं हंसता।
अगर आप नीचे (जमीन) पर देखेंगे तो आपको कभी इंद्रधनुष नहीं देख पाएंगे।
बिना कुछ करे कल्पना का कोई मतलब नहीं है।
आप किसका अर्थ जानना चाहते हैं? ज़िन्दगी इच्छा है, अर्थ नहीं।
जिस दिन आप हंसते नहीं वो दिन बेकार चला जाता है।
एक आवारा, एक सज्जन, एक कवि, एक सपने देखने वाला, एक अकेला आदमी, हमेशा रोमांस और रोमांच की उम्मीद करते है।
असफलता बहुत ही गैरजरूरी चीज है।  इसके लिए खुद को मूर्ख बनाने की हिम्मत की दरकार होती है।
मेरा दर्द किसी के हंसने का कारण हो सकता है पर मेरी हंसी कभी भी किसी के दर्द कारण नहीं  होनी चाहिए।
गर आप जमीन पर देखेंगे तो कभी इंद्रधनुष नहीं देख पाएंगे।
इस अजीबोगरीब दुनिया में कुछ स्थायी नहीं है, यहां तक कि परेशानियां भी।
पास से देखने पर जिंदगी ट्रेजडी लगती है और दूर से देखने पर कॉमेडी।
आदमी का असली चेहरा तब दिखता है जब वह नशे में होता है।
अगर लोग आपको अकेला छोड़ दें तो जिंदगी खूबसूरत हो सकती है।
मुझे कॉमेडी करने के लिए सिर्फ पार्क, पुलिसकर्मी और एक खूबसूरत लड़की की जरूरत है।
असफलता बहुत ही गैरजरूरी चीज है। इसके लिए खुद को मूर्ख बनाने की हिम्मत की दरकार होती है। 
मुझे बारिश में चलना पसंद है क्योंकि उसमें कोई भी मेरे आंसू नहीं देख सकता।
हम सोचते बहुत ज्यादा हैं लेकिन महसूस बहुत कम करते हैं।
ईश्वर के साथ मैं बहुत शांति के साथ हूं। मेरा संघर्ष तो इंसानों से हैं।