आज का युवा फिट और हैल्दी रहने के लिए कई प्रकार की कसरत करते हैं जिनमें प्रमुख हैं - एरोबिक्स, जुम्बा, सालसा, पर अब फिट रहने के लिए एनिमल फ्लो फिटनेस प्रोग्राम का भी प्रचलन शुरू हो गया है। जिसे हम बॉलीवुड एक्टर विद्युत जामवाल की आने वाली फिल्म ‘जंगली’ में देखेंगे। 
अपने मार्शल आर्ट के लिए दुनिया में मशहूर बॉलीवुड फिल्म कलाकार विद्युत ने अपनी नई फैमिली एडवेंचर फिल्म ‘जंगली’ के लिए कड़ी ट्रेनिंग करके शानदार बॉडी बनाई है। 
इस फिल्म के माध्यम से वह बड़े पर्दे पर ऐनिमल फ्लो (जानवरों की तरह करतब) मूवमेंट ला रहे हैं। जोकि ऐनिमल फ्लो वर्कआउट का हाईब्रिड फॉर्म है जिसमें जिमनास्टिक, योग और ब्रेकडांसिंग का मेल है। 

वर्कआउट के इस रूप ने विद्युत को जंगली जानवरों की तरह यानि घोड़े, जंगली सुअर, सांप, बिच्छु, हाथी, मेंढक और तितली के करतब बताए और सिखाए हैं।
विद्युत ने इस वर्कआउट में निपुणता पाने के लिए लगातार 2 साल तक कलारिपयट्टु की प्रैक्टिस की थी। एनिमल फ्लो और कलारिपयट्टु एक दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि कलारिपयट्टु में ऐसा माना जाता है कि एक जिंदगी में आप कई जिंदगियों का अनुभव कर सकते हैं। यह कौशल कड़ी मेहनत और अनुशासन के बाद ही पाया जा सकता है। 

‘जंगली’ एक फैमिली एडवेंचर को हॉलीवुड के डायरेक्टर चक रसल (द मास्क और स्कॉर्पियन किंग के लिए मशहूर) डायरेक्ट कर रहे हैं। 
इस फिल्म में हाथी और इंसान के स्पेशल रिश्ते के इर्द-गिर्द होगी। विद्युत जानवरों के डॉक्टर की भूमिका में हैं जो अपने फैमिली एलिफेंट रिजर्व में इंटरनेशनल शिकारियों के रैकेट का पता लगाते हैं और उससे लड़ते हैं। यह फिल्म 5 अप्रैल को रिलीज होगी। 

क्या है एनिमल फ्लो वर्कआउट 
एनिमल फ्लो शब्द से साफ जाहिर होता है कि जैसे जानवर अपने करतब करता है वैसे ही अगर मानव अपना व्यायाम करता है तो एनिमल फ्लो वर्कआउट कहते है। 
यानि इसमें अपनाई जाने वाली आसन विधियों में एनिमल के जैसे चलना, उछल-कूद, उनके सोने के तरीकों को उसी अंदाज में किया जाता है।
एनिमल फ्लो फिटनेस प्रोग्राम में सिर से लेकर पैर की अंगुलियों तक का व्यायाम (वर्कआउट) होता है।
इस व्यायाम को करने के लिए किसी भी तरह के उपकरणों की जरूरत नहीं होती है। इसके लिए जिम या कोई क्लास जॉइन करने की भी जरूरत नहीं है। खुले पार्क, गार्डन या किसी कमरे में इसे अकेले ही कर सकते हैं। अधिकांश व्यायाम कैलोरी बर्न करके वजन घटाने के लिए किए जाते हैं, लेकिन इस व्यायाम से वजन भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा स्ट्रेस बस्टर के रूप में भी इस वर्कआउट को किया जा रहा है।

अमेरिका में इस व्यायाम की शुरुआत 2011 में हुई थी। पिछले कुछ सालों से भारत में भी लोग इसे तेजी से अपना रहे हैं। कई शहर में फिटनेस सेंटर्स ने अपने दूसरे कार्यक्रमों के साथ इसे भी शुरू कर दिया है। इसके सकारात्मक परिणाम कुछ ही महीनों में सामने आने लगते हैं। 

इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं हैं। दूसरे वर्कआउट की जगह इसमें अधिक कैलोरीज खर्च होती हैं। इससे दिमाग में स्थिरता और एकाग्रता बढ़ती है।