गिनी गुणांक

  • समाज में व्याप्त आय एवं सम्पत्ति के असमान वितरण की माप ‘सांख्यिकी’ आधार पर करना गिनी गुणांक कहलाता है। यदि गिनी गुणांक मान ‘शून्य’ है, तो समाज के सभी व्यक्तियों की आय समान मानी जाएगी। इसके विपरीत यदि गिनी गुणांक का मान 1 है, तो इसका अर्थ है कि समाज में कुछ वर्ग विशेष के पास देश की समस्त आय केन्द्रित है। 
  • दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि गिनी गुणांक का मान जितना अधिक होगा समाज में विषमता भी उतनी अधिक होगी। इसके विपरीत गिनी गुणांक का मान जिनता कम होगा या शून्य वहां सभी व्यक्तियों की आय को समान माना जाएगा।
  • वेबरीज वक्र यह वक्र किसी अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के स्तर तथा रोजगार उपलब्धता के स्तर के बीच का संबंध वक्र द्वारा प्रदर्शित करता है।
  • नोटः- बेरोजगारी के स्तर तथा रोजगार उपलब्धता के स्तर में विपरीत संबंध होता है।

फिलिप्स वक्र-

  • यह वक्र देश में बेरोजगारी के स्तर और मौद्रिक मजदूरी में परिवर्तन की दर को दर्शाता है। इस वक्र के माध्यम से बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के मध्य व्याप्त नकारात्मक संबंध को दर्शाया जाता है अर्थात् अगर मुद्रास्फीति की दर अधिक होगी तो बेरोजगारी की दर घटेगी अंततः अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी की एक निश्चित स्तर मजदूरी में परिवर्तन के कारण रोजगार में परिवर्तित हो जाएगा।
  • उदाहरण- एक व्यक्ति अ है वह ब की मदद करता है बाजार में मुद्रास्फीति के कारण अ का व्यय बढ़ेबा और उसकी बचत कम होगी अतः अब वह ब की मदद नहीं करेगा और ब को स्वयं रोजगार ढूंढना पड़ेगा यदि मुद्रास्फीति होती, तो ब बेरोजगार रहता है और अ ब के साथ-साथ स की भी मदद करता।