• मेरे प्यारे भारतवासियों, मैं न किसी धर्म से प्रेरित हूं और ना ही किसी विचारधारा से। क्योंकि जब तक हम कर्म नहीं करेंगे तब तक उसका फल नहीं मिलेगा। न कोई धर्म बैठे आदमी को खाने को देता है और न ही कोई विचारधारा।
  • आज के भारतीय राजनीतिक दौर में जिस प्रकार की गतिविधियां देखी जा रही है वह बिल्कुल ही अलग हैं। लोगों में सकारात्मक महत्त्वाकांक्षा तो जिन्दा है ही नहीं, वे तो नकरात्मक महत्त्वाकांक्षा को लेकर जीते हैं। वे प्रतिशोध की राजनीति कर रहे हैं। इसलिए हमारें स्वतंत्रता सेनानी उपेक्षा के पात्र बन रहे हैं। कभी कोई किस क्रांतिकारी को लेकर लड़ने लग जाते हैं, तो कभी दूसरी विचारधारा के स्वतंत्रता सेनानी को लेकर।
  • क्या मैं जान सकता हूं कि उनका उद्देश्य क्या था?
  • उन सबका एक ही ध्येय था देश की आजादी।
  • यह कविता मैं किसी मंच पर नहीं गा सकता क्योंकि ‘मैं मंचों का कवि नहीं हूं’ किंतु कोई इसे गाना चाहे तो मैं मना भी नहीं करूंगा। 


हां हम सम्मान करेंगे उनका,
जो आजादी के दीवानें हैं।
हम बंटेंगे नहीं उन्हें लेकर,
जिनने दी है आजादी के पर्व में कुर्बानियां।
क्या गांधी, क्या नेहरु, क्या अली बंधु और सावरकर,
प्रश्न न उठाओ उन पर,
उनके समर्पण पर,
क्योंकि हम थे नहीं तब।
हां हम सम्मान....
हां, बहुत कुछ खोया है उनने हमारे वास्ते,
जेल गए किस वास्ते,
ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के वास्ते। 
वरना कौन जेल जाता था,
बिना अपराध के वो या हम।
हां हम सम्मान....
जब ध्येय सबका एक था, 
तो फिर आज फर्क क्यों?
हां, हम न बंटे आजादी के दीवानों पर।
वो शहीद हो गए हंसते-हंसते,
नन्ही सी उम्र में ही क्यों?
शायद हमारे वास्ते ही।
हां हम सम्मान करेंगे....
सब कुछ तो गंवा दिया था उनने,
फिर आप प्रश्न करने वाले कौन हैं,
मत बांटो आजादी के दीवानों को,
निज स्वार्थ प्रबल कर,
तुम राजनीति करते हो,
पर आजादी के दीवानों पर नहीं,
वो शहीद हो गए मातृभूमि पर,
मत बांटो आजादी के दीवानों,
हम नहीं जानते कितने कष्ट भोगे हैं उनने,
बस हमें सम्मान करना है उनका,
कितना त्याग किया किसने,
ये मत पूछो आज,
क्योंकि हम हैं आजाद,
उनके बलिदान पर।
हां, हम सम्मान करेंगे उनका,
जो आजादी के दीवानें हैं। 
कवि- राकेश सिंह राजपूत

  • मेरे प्यारे देशवासियों यदि कविता अच्छी लगे तो मैं तो यह कहता हूं कि आप किसी भी स्वतंत्रता सेनानी पर प्रश्न न उठाए, जैसा कि आज देखने को मिल रहा है। बल्कि हमें सब स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों का सम्मान करना चाहिए ताकि सबको सम्मान मिल सकें। उन सबने अपना बहुत कुछ खोया है। 
  • शायद हम बातें या टांग खिंचाई कर सकते हैं। इसलिए हम आजादी के दीवानों पर तर्क करते हैं और फर्क करते हैं। अगर आप सच्चे भारतीय हैं तो किसी भी स्वतंत्रता सेनानी पर सवाल न खड़े करें।