• चार बार फीफा विश्व कप जीत चुके जर्मनी के तमाम फुटबॉल मैदानों पर इस समय जोधपुर (राजस्थान) के हैण्डीक्राफ्ट दस्तकारों की बनाई सीटी गूंज रही है।
  • जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट आर्टिजन की बनाई होर्न व बोन से बनी सीटी की विश्व बाजार में भारी मांग है।
  • जर्मनी सहित विश्व फुटबॉल से जुड़े अन्य यूरोपीय देशों में जोधपुरी सीटी की मांग बढ़ी है। हाल ही में जर्मनी से जोधपुर की तीन हैण्डीक्राफ्ट कम्पनियों को करीब 15 हज़ार सीटियों का ऑर्डर मिला है।
  • जून 2018 में रूस में हुए फीफा वर्ल्ड कप में भी जोधपुरी दस्तकारों द्वारा बनाई सीटी का उपयोग किया गया था।
  • अपने दमदार आवाज और बेमिसाल मजबूती के कारण इस जोधपुरी सीटी को फुटबॉल के मैदान में रेफरी से लेकर पालतू जानवरों के ट्रेनर तक सभी पसंद करते हैं।


इसकी खूबी है इन्फेक्शन फ्री होना - 

  • सीटी बनाने के लिए पहले होर्न को सुखाया जाता है फिर इसके अलग-अलग टुकड़े काटे जाते हैं। 
  • होर्न को रासायनिक क्रियाओं के बाद ऐसा बनाया जाता है कि मुंह में कोई इन्फेक्शन न हो। 
  • डिजाइनिंग के बाद तराशने व सुराख बनाने और अंत में पॉलिश का काम होता है। 
  • टेस्ट में पास होने पर ही इन्हें निर्यात किया जाता है। 

सीटियों का आकार -

  • दो प्रकार के आकार की सीटी बनाई जाती है जिसमें बड़ी 85 मिमी यानि 8.5 सेमी की और छोटी 65 मिमी की होती है। 
  • जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टस एसोसिएशन