फर्क कब नहीं हुआ,
मानव-मानव में।
पहले शिक्षित नहीं थे, 
तभी शोषित-शोषक में फर्क था।
पर अंग्रेज तो शिक्षित थे,
फिर क्यों 200 साल शोषण किया,
भारत ही नहीं पूरी दुनिया को गुलाम बनाया।
भेदभाव तब भी मानव-मानव में था,
अंग्रेज काली चमड़ी से नफरत करते थे।
और हमें पढ़ाया भारतीय शोषक थे,
और छुआछूत करते थे।
हां, अब भी फर्क होता है,
फर्स्ट क्लास, वीआईपी, एसी क्लास में बंटे हैं।
अब इन्हें आधार बनाकर,
अपनों से प्रतिशोध ले रहे हैं।
चतुर लोग लड़ाकर,
अपने घर भर रहे हैं।


अब कौन कहेगा,
ये लोकतंत्र है,