बहुआयामी गरीबी सूचकांक क्या है?


  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) की ओर से 17 अक्टूबर, 2022 को जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) में भारत के गरीबी उन्मूलन प्रयासों की सराहना की गई।
  • इस रिपोर्ट में कहा कि इससे साफ है कि 2030 तक गरीबों की संख्या को आधी करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। भारत का प्रयास अध्ययन करने लायक हैं। भारत में वर्ष 2005-06 से 2015-16 में 27.5 करोड़ और 2015-16 से 2019-21 के बीच 14 करोड़ लोग गरीबी के चंगुल से निकले।
  • संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वर्ष 2005-06 से 2019-21 के बीच भारत में करीब 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। यह ऐतिहासिक परिवर्तन है।
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2020 में भारत की जनसंख्या के आंकड़ों के हिसाब से 22.89 करोड़ गरीबों की संख्या दुनियाभर में सबसे ज्यादा है। भारत के बाद 9.67 करोड़ गरीबों के साथ नाइजीरिया दूसरे स्थान पर है।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक Multidimensional Poverty Index (MPI) कौन जारी करता है?

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Program: UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (Oxford Poverty and Human Development Initiative: OPHI) द्वारा वर्ष 2010 में पहली बार बहुआयामी गरीबी सूचकांक विकसित किया गया।

एमपीआई के 3 आयाम एवं 10 संकेतक

ग्लोबल एमपीआई 2021 के अनुसार भारत की रैंक 109 देशों में 66वें स्थान पर है।

राष्ट्रीय बहुआयामी निर्धनता सूचकांक—

  1. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (2015-16) पर आधारित बेसलाइन रिपोर्ट नीति आयोग द्वारा 12 संबंधित मंत्रालयों के परामर्श से तथा राज्य सरकारों और सूचकांक प्रकाशन एजेंसियों— ऑक्सफोर्ड निर्धनता और मानव विकास पहल और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ साझेदारी से विकसित की गई है।
  2. एनएफएचएस—4 पर आधारित बेसलाइन रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लक्ष्य 1.2 की दिशा में प्रगति को मापने के संदर्भ में एक योगदान है। जिसका उद्देश्य 'सभी आयामों में गरीबी में जी रहे सभी उम्र के पुरुषों, महिलाएं और बच्चों के अनुपात को कम से कम आधा करना है।' स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन आयामों में, इसमें पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, बैंक खाते और संपत्ति पर आधारित संकेतक शामिल है।