राजस्थान हस्तशिल्प नीति-2022


Rajasthan Handicraft Policy-2022

  • 17 सितंबर, 2022 को राजस्थान की उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्रीमती शकुंतला रावत ने राज्य की प्रथम हस्तशिल्प नीति-2022 जारी की गई।

राजस्थान हस्तशिल्प नीति-2022 rajasthan hastshilp niti 2022

  • राज्य के हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों का उत्थान करते हुए इस क्षेत्र के दस्तकारों की राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित कराना। हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों के लिए तकनीकी उन्नयन, विपणन सहयोग, वित्तीय सहायता, सामाजिक सुरक्षा तथा क्लस्टर्स/क्राफ्ट विलेज में आाधारभूत सुविधाओं का विकास ताकि राज्य की परम्परागत शिल्प कलाओं के विकास के साथ—साथ रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित हों।


उद्देश्य

  • राज्य के हस्तशिल्पियों का आर्थिक उत्थान एवं विकास।
  • राज्य के हस्तशिल्पियों के उत्पादों के लिए बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था करना।
  • राज्य के हस्तशिल्पियों के उत्पादों को निर्यात योग्य बनाना एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना व निर्यात में राज्य की भागीदारी बढ़ाना।
  • विलुप्त होती परम्परागत हस्त कलाओं को पुनर्जीवित करना।
  • राज्य के हस्तशिल्पियों को सशक्त बनाते हुए उनकी राज्य के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • हस्तशिल्प के क्षेत्र में आगामी 5 वर्षों में 50,000 नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।


अवधि

  • राजस्थान हस्तशिल्प नीति-2022 अधिसूचना की तिथि से 31 मार्च, 2026 तक प्रभावी रहेगी। 


राजस्थान हस्तशिल्प नीति-2022 क्या है, इसे कब जारी किया गया?

- 17 सितंबर, 2022 को 

  • इस नीति के साथ ही राजस्थान एमएसएमई नीति-2022 जारी की गई।
  • राज्य की प्रथम हस्तशिल्प नीति लागू होने से टेक्सटाइल, मेटल एंड वुड, कारपेट, दरी, नमदा, सेरेमिक एवं क्लेआर्ट, पेंटिंग, लेदर क्राफ्ट, ज्वैलरी आदि के दस्तकारों को लाभ होगा। 
  • राजस्थान हस्तशिल्प नीति-2022 का उद्देश्य हस्तशिल्पियों के उत्थान के लिए बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था, परम्परागत कलाओं एवं विलुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित करना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।