आज के दौर में युवा ऑफर के चक्कर में क्रेडिट कार्ड का बिल टाइम से जमा नहीं कर पाते। बेचारो के पास अब ऑप्शन नहीं बचे हैं। वरना तो उनके लिए क्या ब्रांडेड सामान खरीदना मुश्किल था।

हाय, रोना आता है न जानें क्यों।
आज के युवा की दशा को देख,
चला है चक्कर लव आजकल का,
मंदी की मार जारी है और ऑफर है बड़े भारी
पर जेब है टाइट क्योंकि नहीं है इसमें पैसों की बाइट,
हाथ खर्च टाइट हुआ है,
क्योंकि अब ब्रांड वैल्यू उनका बढ़ा है,
जो सीधे युवा की जेब पर पड़ा है।
अच्छा है उन्हें तो ओर से इनकम है,
लुटता तो युवा हैं
पहले नायक बनाते हैं,
और वहीं एक दिन अपनी ब्रांड वैल्यू बढ़ाते हैं।
खैर, हमें क्या हम थोड़े खरीदते हैं ब्रांडेड कपड़े,
महंगे चश्मे, ब्रांडेड जूते, घड़ी,
सच है नहीं है हमारी तनख्वाह ऐसी,
जो ब्रांड वैल्यू का भार सह सके,
इसलिए हमने तोड़ लिया है नाता,
फिल्मी दुनिया से,
क्रिकेट की दुनिया से,
अब हम देते हैं अपनी आय पर ध्यान,
क्योंकि अब पत्नी संग हर मोड़ पर,
कम तनख्वाह के कारण सुनने पड़ते हैं ताने,
ऐसे में कोई ब्रांड वैल्यू वाले नहीं आते,
हमें ही बचाने होंगे अपने रिश्ते,
क्योंकि प्यार का वास्ता दिया था,
अब निभाने हैं तो तोड़ना होगा,
ब्रांड वैल्यू वालों से वास्ता या
अपनों से नाता।
हम पर जिम्मेदारी है अनेक,
आय का रास्ता है एक।
सच तो यह है,
उनकी इनकम के साधन है अनेक,
खेल, अभिनय से तो कमाते हैं,
साथ ही ब्रांड वैल्यू बढ़ाते हैं।
वो हैं बड़े खिलाड़ी,
रहते हैं रॉयल अंदाज में,
हमसे क्यों कहते हैं लाइफ एंजॉय करो।
हमारी आय भी फिक्स,
तो इनकी ब्रांड वैल्यू की मार,
पड़ेगी हम आम जन पर भारी।
अब कौन कहेगा,
ये रॉयल अंदाज कैसा है,
जिसको जिन्दा रखने के लिए,
आज भी ब्रांड वैल्यू आमजन को अप्रत्यक्ष रूप से चुकानी पड़ती है।

ये कविता किसी वर्ग विशेष को हानि पहुंचना नहीं बल्कि आमजन पर पड़ रहे अप्रत्यक्ष भार को बताना है ताकि सेलिब्रिटी अपना मेहनताना आमजन पर पड़ने वाले आर्थिक भार को ध्यान में रख कर कंपनियों के विज्ञापन करें।

जय हिंद!