• बॉलीवुड की सबसे जिंदादिल एक्ट्रेस में शुमार जोहरा सहगल की 10 जुलाई को 5वीं पुण्यतिथि हैं। अपने पैशन और आत्मविश्वास के लिए जानी जाने वाली जोहरा ने उस दौर में एक्ट्रेस बनने का फैसला किया था जब फिल्मों में महिलाएं आने से कतराती थी। वह बॉलीवुड में एक मशहूर एक्ट्रेस, नृत्यांगना और कोरियोग्राफर थी। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत उदय शंकर की मंडली में एक नर्तकी के रूप में की थी। उनका बॉलीवुड में कॅरियर 80 वर्षों से अधिक समय का रहा है।  
  • जोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रेल, 1912 में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में सुन्नी मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम साहिबज़ादी ज़ोहरा बेगम मुमताज़ उल्लाह खान था। जब वह सात वर्ष की थी तब मोतियाबिंद होने से उनकी बायीं आंख की रोशनी चली गई। वह बचपन से ही उग्र स्वभाव की थी। 
  • उनकी मां की आखिरी इच्छा थी कि जोहरा ग्रेजुएशन करे, इसलिए जोहरा ने वर्ष 1929 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 1933 में लाहौर के क्वीन मैरी कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद जोहरा ने एक ब्रिटिश एक्टर से यूरोप में एक्टिंग की ट्रेनिंग ली थी। वह उस दौर में हुई थी जब महिलाएं पुरुषों के सामने आने में भी सकुचाती थी लेकिन जोहरा ऐसी महिला नहीं थी वह पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों से मिलती थी। एक बार यूरोप में उन्होंने उदय शंकर को परफॉर्म करते देखा तो वह सीधे उनसे मिलने चली गई और उनसे टीम में शामिल करने का आग्रह किया। जोहरा की काबिलियत और उनके आत्मविश्वास को देखकर उदय शंकर भी मना नहीं कर सके और उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया। उन्होंने इसके बाद जापान, मिस्त्र, यूरोप और अमेरिका जैसे कई देशों की यात्रा अपनी टीम के साथ की.
  • जोहरा ने कामेश्वर सहगल के साथ 14 अगस्त, 1942 को शादी के बंधन में बंधी। कामेश्वर उनसे आठ वर्ष छोटे थे। उनके दो बच्चे थे, किरण सहगल और पवन सहगल। पवन सहगल WHO के लिए काम करते हैं। किरण एक बेहद प्रतिष्ठित ओडिसी नर्तकी हैं। उन्होंने अपनी मां जोहरा सहगल की जीवनी 'जोहरा सहगल: फैटी' शीर्षक नाम से वर्ष 2012 में लिखी थी। 

ज़ोहरा का कॅरियर

  • जोहरा ने अपने कॅरियर की शुरुआत उदय शंकर की मंडली में एक नर्तकी के रूप में की थी और मंडली के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान जैसे देशों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
  • वर्ष 1945 में जोहरा पृथ्वी थिएटर से जुड़ी और उनके साथ 15 वर्ष तक काम किया। वह पृथ्वीराज कपूर को बहुत सम्मान देती थी और थिएटर में उन्हें अपना गुरु मानती थीं। वर्ष 1946 में ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन में इप्टा के पहले फ़िल्म प्रोडक्शन 'धरती के लाल' और फिर इप्टा के सहयोग से बनी चेतन आनंद की फ़िल्म 'नीचा नगर' में जोहरा ने अभिनय किया।  
  • 'नीचा नगर' पहली ऐसी फ़िल्म थी जिसे अंतर्राष्ट्रीय कान्स फिल्म समारोह में गोल्डन पाम पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने फिल्मों में अभिनय के साथ गुरु दत्त की 'बाज़ी' (1951), राज कपूर की 'आवारा' समेत कई हिन्दी फिल्मों के लिए कोरियोग्राफर के तौर पर भी काम किया। कुछ फिल्मों में निर्देशन और फिर निर्देशक की भूमिका भी निभाई।
  • वर्ष 1959 में जोहरा के पति कामेश्वर की असमय मृत्यु होने के बाद वह दिल्ली आ गई और नवस्थापित नाट्य अकादमी की निदेशक बन गई। वर्ष 1962 में वह एक ड्रामा स्कॉलरशिप पर लंदन गई, जहां उनकी मुलाकात भारतीय मूल के भरतनाट्यम नर्तक रामगोपाल से हुई और उन्होंने चेलेसी स्थित उनके स्कूल में वर्ष 1963 में उदयशंकर शैली के नृत्य सिखाना शुरू कर दिया। यहीं उन्हें वर्ष 1964 में बीबीसी पर रूडयार्ड किपलिंग की कहानी में काम करने का मौका मिला।
  • जोहरा लंदन से वर्ष 1990 के दशक में वापस भारत लौटी और कुछ महीनों तक बर्दवान में रहीं। उस समय उसने कई फिल्मों, नाटकों और टीवी श्रृंखलाओं में अभिनय किया।
  • वर्ष 1996 से जोहरा सहगल एक बार फिर बॉलीवुड में सक्रिय हो गई और दादी मां की भूमिकाओं में दिखाई देने लगी। इन फिल्मों में दिल से, हम दिल दे चुके सनम, वीर जारा, सांवरिया और चेनी कुम जैसी बड़ी बजट वाली फिल्मों में उन्होंने दमदार अभिनय किया। 
  • वर्ष 2002 में रिलीज हुई फिल्म चलो इश्क लाड्ए के समय जोहरा की उम्र 90 वर्ष थी। इस फिल्म में वह मुख्य केंद्रीय पात्र थी और गोविंदा ने उनके पोते की भूमिका निभाई। इसके एक सीन में वह एक बाइक की सवारी करती हैं और गुंडों के साथ लड़ती भी है। नवंबर, 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘सांवरिया’ उनकी आखिरी फिल्म थी।
  • वर्ष 2008 में नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNPF) -Ladli मीडिया अवार्ड्स में, उन्हें शताब्दी की लाडली नामित किया गया।
  • जोहरा ने कॅरियर में उन्होंने कई पीढ़ियों के एक्ट्रर्स के साथ काम किया जिसमें पृथ्वीराज कपूर, अशोक कुमार, देव आनंद, गोविंदा, शाहरुख खान, सलमान खान, अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर शामिल हैं।

जोहरा सहगल को मिले कई अवॉर्ड 


  • 1963: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
  • 1998: पद्म श्री
  • 2001: कालिदास सम्मान
  • 2002 : पद्म भूषण
  • 2004: संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप
  • 2010: पद्म विभूषण


जोहरा सहगल का निधन

जोहरा को निमोनिया हो जाने की वजह से 9 जुलाई, 2014 को दक्षिणी दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था और यही पर 102 वर्ष की अवस्था में उनकी हृदयगति रूक जाने की वजह से 10 जुलाई, 2014 को मृत्यु हो गई। 11 जुलाई को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान में उनका अंतिम संस्कार किया गया।