भारतीय संसद

भारत की केन्द्रीय व्यवस्थापिका को संसद कहा जाता है। भारतीय संसद के तीन अंग हैं- राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।
राज्यसभा और लोकसभा के रूप में संसद के दो सदन हैं। राज्यसभा को उच्च सदन और लोकसभा को निम्न सदन कहते हैं। इस प्रकार भारतीय संसद द्विसदनात्मक है।
अनु. 79 के अनुसार भारतीय संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी और दोनों सदनों के नाम क्रमशः राज्यसभा और लोकसभा होंगे।
संसद देश में कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्था है।
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है क्योंकि इसकी अनुमति के बिना राज्यसभा तथा लोकसभा द्वारा पारित कोई भी विधेयक अधिनियम का बल नहीं रखेगा तथा कुछ ऐसे विधेयक हैं, जिन्हें राष्ट्रपति की अनुमति के बिना लोकसभा में पेष नहीं किया जा सकता और उसे राज्यसभा तथा लोकसभा के सत्र बुलाने तथा सत्रावसान करने और लोकसभा को विघटित करने का अधिकार हैं।
विशय के संबंध में भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र अथवा उसके किसी क्षेत्र विषेश के लिए विधि निर्माण कानूनी होगा।

गणपूर्ति (कोरम)
राज्यसभा में गणपूर्ति के लिए कुल सदस्य संख्या का दसवां भाग निर्धारित किया गया है। गणपूर्ति की आवष्यक संख्याा पूरी नहीं करने पर सदन की बैठक स्थगित कर दी जाती है।
संसद की गतिविधियां
 प्रश्न काल
दोनों सदनों में प्रत्येक बैठक के पहले घंटे के समय को प्रश्नकाल कहा जाता है, जिसमें प्रश्न पूछे जाते हैं तथा उनका उत्तर दिया जाता है। सामान्यतः प्रश्न मंत्रियों अर्थात् सरकारी सदस्यों से ही पूछे जाते हैं तथा उनका उत्तर दिया जाता है। कभी-कभी गैर-सरकारी सदस्यों से भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं। यदि उनका विषय किसी ऐसे विधेयक, संकल्प या अन्य किसी विशय से संबंधित हो, जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी हो।